An important story by Nishi Bhat, Hindustan Daily for parents and their children on coping examination results
इंस्टीटय़ूट ऑफ ह्यूमन बिहेव्यिर एंड एलायड साइंस के मनोचिकित्सक डॉं. ओम प्रकाश ने बताया कि निश्चित रूप से टॉपर्स के पास बेहतर स्कूल में प्रवेश के अधिक मौके होते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कम अंक आने वाले छात्रों में प्रतिभा की कमी होती... है। करियर काउंसलिंग के लिए आने वाले ऐसे बच्चों की सफलता का प्रतिशत अधिक देखा गया है, जिन्होंने सेकेंडरी या सीनियर सेंकेंडरी में अधिक बेहतर प्रदर्शन नहीं किया था।
बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर हताश या निराश न हों। जरूरी नहीं हर छात्र की प्रतिभा का आकलन बेहतर अंकों से ही किया जाएगा। मनोचिकित्सकों का कहना है कि बेहतर प्रयास के बाद भी यदि परिणाम अच्छा नहीं आया है तो छात्रों को मायूस होने की जरूरत नहीं है। इसे जीवन का पहली और आखिरी परीक्षा नहीं समझना चाहिए।
बेहतर अंक लाने वाले अन्य बच्चों से तुलना न करें
बच्चा जिस विषय में बेहतर है, उसकी तारीफ करें
करियर के अन्य बेहतर विकल्प पर चर्चा करें
इसमें बच्चे की रूचि को भी शामिल करें
बच्चे को अकेले या फिर एकांत में बिल्कुल न रहने दें
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