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Tuesday, February 19, 2013

Internet addiction worrisome for Indian children

इंटरनेट नाम के वायरस से सावधान!

http://navbharattimes.indiatimes.com/children-are-becoming-internet-addicts/articleshow/17504025.cms

सुशील कुमार त्रिपाठी
नई दिल्ली।।
अगर आपका बच्चा इंटरनेट ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है। बात-बात में गुस्सा दिखाता है, अक्सर कनफ्यूज रहता है, क्लासरूम में भी उसकी परफॉर्मेंस में गिरावट हो रही है और इस वजह से वह डिप्रेशन का शिकार है। तो समझो कि इंटरनेट से निकला दिमागी वायरस उसके ब्रेन में घुस चुका है। अगर ऐसा होता है तो इंटरनेट की पहुंच से उसे दूर ही रखें। जरूरत हो तो थोड़ा बहुत इस्तेमाल करने दें। दरअसल नेट के ज्यादा इस्तेमाल से एक अलग तरह की दिमागी बीमारी सामने आ रही है। ये लक्षण उसी बीमारी के हैं।

यही नहीं, ज्यादा उम्र वालों में तो इसकी वजह से बीपी तक की शिकायत देखी गई है। मूड डिसआर्डर के साथ-साथ इटिंग डिसआर्डर भी सामने आ रहे हैं। इसमें लोग खाना-पीना तक छोड़ देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट की वजह से हर चीज आसान हुई है। लोग 10-10 घंटे या इससे भी ज्यादा समय इस पर बिताते हैं। नेट का एक तरह से एडिक्शन हो जाता है। न मिलने पर बेचैनी होने लगती है। बीपी भी अचानक हाई हो जाता है। नेट एडिक्शन की वजह से कुछ लोग तो अपनी एक अलग ही दुनिया बना लेते हैं। उन्हें पॉरनॉग्रफ़ी जैसी चीजें देखने की आदत हो जाती है। ये लोग खासकर कम उम्र के बच्चे फैंटेसी की दुनिया में खोए रहते हैं। ये फैमिली या फ्रेंड को इग्नोर करते हैं और मौका मिलते ही नेट का इस्तेमाल करते हैं। रात-रात भर जागने से उनमें कई तरह की बीमारियां पैदा होने लगती हैं। रियल लाइफ से हटकर ये अलग दुनिया में खोए रहते हैं। इहबास के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि नेट के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से याददाश्त पर काफी फर्क पड़ता है। मेमोरी कमजोर होने लगती है। बहुत सारे बच्चों की इसी वजह से पढ़ाई लिखाई में अचानक ही कमजोरी दिखने लगती है। मां बाप को चाहिए कि कम उम्र में ही इंटरनेट की पहुंच से बच्चों को दूर रखें। जरूरत हो तो बच्चों द्वारा नेट के इस्तेमाल पर अपना कंट्रोल रखें।
 

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