http://dialogueindia.in/magazine/gupt%20rog%20story
Important news story by Surinder Prabhat Khurdia
गुप्त रोग की समस्याएं कितनी गुप्त हैं। इस ओर आज दिन तक किसी का ध्यान नहीं गया और ना ही सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर सर्वे कराया गया। ऐसे मैसर्स एण्ड थेरेपी सेन्टर, आयुर्वेदिक दवाखाना, फार्मेसी, क्लीनिक इत्यादि संभवतया अच्छा इलाज करतें हों। परन्तु लगता नहीं है कि वो इलाज करते होंगे। ज्यादातर तो इलाज के नाम पर छलावा ही होते हैं। वो इलाज के नाम पर मन की भ्रातियों को हवा देते होंगे जिससे सेक्स संबंधित समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ ही जाती होगी।
आज हर तरह की बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में संभव है। यहां तक कि यौन संक्रमित रोगों तक का इलाज संभव है। यही नहीं, दवाएं तक फ्री दी जाती है। फिर सवाल उठता है कि लोग सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में इलाज कराने के बजाय ऐसे लोग पैसा और समय क्यों बरबाद करते हैं?
मानव व्यवहार एवं संबंधित विज्ञान संस्थान में एसोसिएट प्रो. ओमप्रकाश कहते हैं कि सेक्सुअल और अन्य मनोविकार की समस्याओं को इलाज एवं काउन्संिलग के माध्यम से सुलझाया जा सकता हैं । परन्तु अज्ञानतावश थेरेपी सेन्टर, आयुर्वेदिक दवाखाना, फार्मेसी, क्लीनिक इत्यादि में जाना पसन्द करते हैं, क्योंकि उनकी सोच भी वैसी ही है। सेक्स समस्याओं को गुप्त रोग मानने की मानसिकता कायम है। यह यौन शिक्षा का अभाव है। जब यौन हिंसा या हिंसात्मक अपराध पर पूरे देश में बहस चल सकती हैं तब यौन शिक्षा पर बात करना कौन-सा जुर्म हैं? इस पर बिल भी लंबित है। प्रतिवर्ष गुप्त रोग के नाम पर शिकार होने वालों का आकड़ा काफी बड़ा है।
सामुदायिक चिकित्सा विज्ञान मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर जुगलकिशोर जो अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान से सेवानिवृत और सेक्स एण्ड मैरिज क्लीनिक के संस्थापक डॉक्टर प्रेम बालि के साथ सेक्सुअल मेडिसीन विषय पर कार्य कर चुके हैं, का कहना है कि हमारे देश में यौन समस्याओं के नाम पर जो उपाय बताए जाते हैं, वे वैज्ञानिक नहीं हैं।
Important news story by Surinder Prabhat Khurdia
गुप्त रोग की समस्याएं कितनी गुप्त हैं। इस ओर आज दिन तक किसी का ध्यान नहीं गया और ना ही सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर सर्वे कराया गया। ऐसे मैसर्स एण्ड थेरेपी सेन्टर, आयुर्वेदिक दवाखाना, फार्मेसी, क्लीनिक इत्यादि संभवतया अच्छा इलाज करतें हों। परन्तु लगता नहीं है कि वो इलाज करते होंगे। ज्यादातर तो इलाज के नाम पर छलावा ही होते हैं। वो इलाज के नाम पर मन की भ्रातियों को हवा देते होंगे जिससे सेक्स संबंधित समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ ही जाती होगी।
आज हर तरह की बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में संभव है। यहां तक कि यौन संक्रमित रोगों तक का इलाज संभव है। यही नहीं, दवाएं तक फ्री दी जाती है। फिर सवाल उठता है कि लोग सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में इलाज कराने के बजाय ऐसे लोग पैसा और समय क्यों बरबाद करते हैं?
मानव व्यवहार एवं संबंधित विज्ञान संस्थान में एसोसिएट प्रो. ओमप्रकाश कहते हैं कि सेक्सुअल और अन्य मनोविकार की समस्याओं को इलाज एवं काउन्संिलग के माध्यम से सुलझाया जा सकता हैं । परन्तु अज्ञानतावश थेरेपी सेन्टर, आयुर्वेदिक दवाखाना, फार्मेसी, क्लीनिक इत्यादि में जाना पसन्द करते हैं, क्योंकि उनकी सोच भी वैसी ही है। सेक्स समस्याओं को गुप्त रोग मानने की मानसिकता कायम है। यह यौन शिक्षा का अभाव है। जब यौन हिंसा या हिंसात्मक अपराध पर पूरे देश में बहस चल सकती हैं तब यौन शिक्षा पर बात करना कौन-सा जुर्म हैं? इस पर बिल भी लंबित है। प्रतिवर्ष गुप्त रोग के नाम पर शिकार होने वालों का आकड़ा काफी बड़ा है।
सामुदायिक चिकित्सा विज्ञान मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर जुगलकिशोर जो अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान से सेवानिवृत और सेक्स एण्ड मैरिज क्लीनिक के संस्थापक डॉक्टर प्रेम बालि के साथ सेक्सुअल मेडिसीन विषय पर कार्य कर चुके हैं, का कहना है कि हमारे देश में यौन समस्याओं के नाम पर जो उपाय बताए जाते हैं, वे वैज्ञानिक नहीं हैं।
No comments:
Post a Comment